Stamp Paper News: बंद होने जा रहे है पुराने स्टाम्प पेपर!, बदलने जा रहा है इंडियन स्टाम्प एक्ट 1899, अब होगा ऐसे काम

Stamp Paper News: भारत सरकार ने 1899 के स्टांप शुल्क अधिनियम को बदलने के लिए एक नया कानून प्रस्तावित किया है। 1899 का कानून ब्रिटिश शासन के दौरान बनाया गया था, और अब वह आधुनिक वित्तीय लेनदेन के लिए उपयुक्त नहीं है। नया कानून, जिसे “भारतीय स्टांप विधेयक 2023” कहा जाता है, पूरे देश में स्टांप शुल्क जमा करने की प्रणाली को सुधारने का प्रयास करता है।

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Stamp Paper News: स्टांप शुल्क क्या है?

स्टांप शुल्क एक प्रकार का कर है जो कागज के दस्तावेजों पर दर्ज वित्तीय लेनदेन पर लगाया जाता है। यह राज्य सरकारों के लिए राजस्व का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। कुछ प्रमुख दस्तावेज जिन पर स्टांप शुल्क लागू होता है उनमें शामिल हैं:

  • संपत्ति बिक्री समझौते
  • शेयर हस्तांतरण फॉर्म
  • बीमा पॉलिसी
  • विनिमय पत्र
  • ऋणपत्र आदि।

स्टांप शुल्क का भुगतान एक निश्चित राशि वाले भौतिक स्टांप पेपर को खरीदकर और उसे कानूनी दस्तावेजों पर चिपकाकर किया जाता है, जो कर भुगतान का प्रमाण होता है। हाल के वर्षों में शुरू की गई ई-स्टांपिंग प्रणाली स्टांप शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करने और दस्तावेजों को डिजिटल रूप से स्टांपित करने की अनुमति देती है, जिससे भौतिक स्टांप की आवश्यकता नहीं होती है।

भारतीय संविधान के अनुसार, स्टांप शुल्क पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को है क्योंकि यह संघ सूची के अंतर्गत आता है। हालांकि, वास्तविक स्टांप शुल्क राजस्व का संग्रह राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है, जैसा कि अनुच्छेद 268 में उल्लेखित है।

प्रस्तावित नए कानून की विशेषताएं

वर्तमान में लागू 1899 का अधिनियम आधुनिक वित्तीय लेनदेन के अनुरूप नहीं है, इसलिए कई कमियों को दूर करने के लिए एक नए कानून की आवश्यकता है। “भारतीय स्टांप विधेयक 2023” की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • एक समान कानून: पूरे देश में स्टांप शुल्क नियमों को एक समान बनाने के लिए विभिन्न राज्यों के कानूनों को मिलाकर एक केंद्रीय कानून बनाना। वर्तमान में, 6 राज्यों के अपने अलग स्टांप शुल्क नियम हैं।
  • डिजिटल दस्तावेजों का कानूनी ढांचा: इलेक्ट्रॉनिक स्टांप और डिजिटल हस्ताक्षर को परिभाषित करके दस्तावेजों की ई-स्टांपिंग के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करना।
  • कठोर दंड प्रावधान: स्टांप शुल्क चोरी रोकने के लिए सख्त दंड का प्रावधान। अधिकतम जुर्माना ₹50,000 से बढ़ाकर ₹5,00,000 करने का प्रस्ताव है।
  • डिजिटल भुगतान विकल्प: कार्ड, वॉलेट आदि जैसे डिजिटल माध्यमों से स्टांप शुल्क का भुगतान करना आसान बनाना।
  • केंद्रीयकृत आईटी आधार: केंद्रीयकृत आईटी आधारभूत संरचना के माध्यम से स्टांप शुल्क प्रशासन को सरल बनाना।
  • वित्तीय साधनों पर छूट हटाना: डिबेंचर, डेरिवेटिव आदि जैसे वित्तीय साधनों पर स्टांप शुल्क में असंगतियों को दूर करना।
  • राज्यों में एकरूपता: सभी राज्यों में अधिक मानकीकरण के लिए स्टांप शुल्क दरों को युक्तिसंगत बनाना।

प्रस्तावित कानून का उद्देश्य कागज रहित लेनदेन को सक्षम बनाकर स्टांप शुल्क संग्रह को आज के डिजिटल वित्तीय परिदृश्य के अनुरूप बनाना है। मसौदा विधेयक पर जनता की प्रतिक्रिया लेने के बाद इसे संसद में पेश किया जाएगा।

प्रस्तावित कानून का महत्व

नए स्टांप शुल्क कानून से कई लाभ मिलने की उम्मीद है:

  • ऑनलाइन दस्तावेज़ीकरण और भुगतान को सुविधाजनक बनाकर व्यापार सुगमता में सुधार
  • कड़े नियमों और अधिक जुर्माने के माध्यम से कर चोरी रोकना
  • अंतरराज्यीय स्टांप शुल्क अंतर और दरों को सरल बनाना
  • नए वित्तीय साधनों को शामिल करके कर आधार का विस्तार करना
  • भारत में डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अपनाने को बढ़ावा देना
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