Business ideas: इस मशीन से कमाओ 50000, हर महीने चलने वाला बिज़नस, चाहे सर्दी हो या गर्मी, घूम मचाएगा

Business ideas: हमारे प्यारे पकौड़े, भारत की जान! हर तरह के, प्याज से लेकर पालक तक, हर स्वाद में लाजवाब! मौसम कोई भी हो, गरमागरम पकौड़े खाने का मज़ा ही अलग है, खासकर बारिशों में और सर्दियों की सुबहों में। लेकिन घर पर पकौड़े बनाना, कई बार, झंझट और गंदगी का काम बन जाता है। यहीं से खुलता है एक नए बिज़नेस का दरवाज़ा – ऑटोमैटिक पकौड़ा मेकिंग मशीन! ये कमाल की मशीन चटपट सैकड़ों पकौड़े बना देती है, बिना ज़्यादा मेहनत के!

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Business ideas: ऑटोमैटिक पकौड़ा मेकिंग

  • ये मशीनें पकौड़ों की ज़बरदस्त डिमांड को पूरी करती है
  • सब्ज़ी काटने, बैटर मिलाने, पकौड़े का आकार देने और तलने जैसे काम खुद करती हैं, हाथ नहीं पड़ता!
  • पकौड़ा बनाना अब मेहनत का काम नहीं, आसान और मज़ेदार!
  • इस मशीन के दो मुख्य हिस्से हैं – सब्ज़ी कटर और ऑटोमैटिक पकौड़ा प्रेस।

झटपट सब्ज़ी काटना

  • तेज स्टेनलेस स्टील के ब्लेड प्याज, आलू, पालक और दूसरी सब्ज़ियों को झटपट काट देते हैं।
  • कट की मोटाई के लिए अलग-अलग प्लेट्स हैं, एक घंटे में 20-30 किलो सब्ज़ी काट सकती है।

पकौड़े बनते ही बनते जाते हैं

  • दो तरह की प्रेस होती है – एक हाथ से चलने वाली और दूसरी पूरी तरह इलेक्ट्रिक।
  • हाथ वाली प्रेस में बैटर डालकर हैंडल को ऊपर-नीचे खींचा जाता है, जिससे आटे के गोले गर्म तेल में गिरते हैं। एक घंटे में 1,400-1,500 पकौड़े बनते हैं!
  • इलेक्ट्रिक प्रेस खुद ही बैटर को गिराकर पकौड़े बनाती है, ज़्यादा ज़रूरत नहीं पड़ती। बड़े पैमाने पर बनाने के लिए ये बढ़िया है। तेल का तापमान भी खुद नियंत्रित होता है।
  • दोनों तरह की प्रेस में अलग-अलग पकौड़े बनाए जा सकते हैं, प्याज, पालक, आलू, सारे लज़ीज़! परंपरागत तरीके से बनाने के मुकाबले, मेहनत ज़्यादा नहीं लगती।

जानते है मशीन के बारे में

ये कमाल की पकौड़ा मशीनें एक बड़े और मुनाफे वाले बाज़ार को निशाना बनाती हैं – पूरे भारत में फैले पकौड़ों के दीवाने! सड़क किनारे के ठेले, रेस्टोरेंट, कैंटीन, केटरर्स और बड़े खाद्य कारखानें, ये सारे इस मशीन के ग्राहक हो सकते हैं। भारत में हर जगह पकौड़े खाए जाते हैं, मतलब बाज़ार बहुत बड़ा है! मशीन की कीमत भी किफ़ायती है, ₹40,000 से ₹50,000 के बीच, तो ज़्यादातर खाने का कारोबार करने वाले इसे खरीद सकते हैं।

ये मशीनें कम मेहनत में ज़्यादा पकौड़े बनाती हैं और कामगारों के खर्च कम करती हैं, इसलिए इनका रिटर्न ऑन इनवेस्टमेंट (ROI) बहुत अच्छा है। थोड़े ही समय में पैसे वसूल हो जाते हैं!

मशीन का रख रखाव ऐसे करे

मशीन बनाने वालों के लिए इनकी सर्विस और रख-रखाव से भी कमाई हो सकती है। स्टेनलेस स्टील की मशीनें सालों तक चलती हैं, लेकिन उनकी सफाई, बैटर पंप की मरम्मत और फ्रायर का ध्यान रखना ज़रूरी है। कुछ चुनौतियां भी हैं, जैसे एक बार में ज़्यादा पकौड़े नहीं बन पाते और हर तरह का आकार नहीं बनाया जा सकता। लेकिन ज़्यादातर ग्राहक तो आराम और कम खर्च देखते हैं, आकार फिक्स होने से परेशान नहीं होते।

निष्कर्ष

इस धंधे को चलाने के लिए नई टेक्नोलॉजी ज़रूरी है। अगर मशीनें खुद बैटर मिला लें और तेल का तापमान अपने आप ठीक कर लें तो और ज़्यादा पसंद की जाएंगी। विदेशों में जहां बड़ी भारतीय आबादी है, वहां भी ये मशीनें बेची जा सकती हैं। दूसरे स्नैक्स जैसे वड़ा पाव बनाने के लिए भी इस मशीन को बदला जा सकता है।

आखिरकार, ये तकनीक ग्राहकों की ज़रूरत को पूरा करती है – गरमागरम पकौड़े, हमेशा तैयार! इस नए उद्योग का भविष्य ज़रूर उज्ज्वल है, ज़रा सोचिए, पारंपरिक खाना बनाने में नई तकनीक का इस्तेमाल करके कितना मुनाफा कमाया जा सकता है! स्वाद के साथ-साथ मुनाफा भी, दोनों हाथों में!

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