Business idea: सालोसाल चलने वाला बिज़नस, मांग इतनी की सप्लाई नहीं कर पाओगे, महीने के 2 लाख कमा रहे है

Business idea: हर घर में बर्तन धोने के लिए स्क्रबर ज़रूरी होता है, इसलिए स्क्रबर बनाने का बिज़नेस एक बेहतरीन मौका है। अच्छे और काम में चलने वाले स्क्रबर की हमेशा माँग रहती है। छोटे निवेश में अच्छा मुनाफ़ा देने वाला कारोबार शुरू करने के लिए ये बहुत अच्छा आइडिया है।


Business idea: स्क्रबर क्या है?

स्क्रबर कपड़े और फोम से बनते हैं, ये फोम हथेलियों को रगड़ने से बचाता है। ये स्टील के स्क्रबर की तरह हाथ नहीं दुखाते और बर्तन भी अच्छी तरह साफ कर देते हैं। बाज़ार में कई तरह के स्क्रबर मिलते हैं:

  • साधारण स्क्रबर – सफेद कपड़े से बने
  • रंगीन स्क्रबर – रंगीन कपड़े से बने
  • ग्लिटर स्क्रबर – चमकदार कपड़े से बने
  • स्टील फोम पैड स्क्रबर – ज़्यादा गंदगी हटाने के लिए अंदर स्टील का पैड लगा होता है

इनमें से स्टील फोम पैड स्क्रबर की सबसे ज़्यादा माँग है क्योंकि ये बहुत अच्छी तरह से साफ करते हैं। रंगीन और ग्लिटर स्क्रबर भी दिखने में अच्छे लगते हैं, इसलिए उनकी भी माँग है।

हर घर में बर्तन धोने के लिए स्क्रबर की ज़रूरत पड़ती है। ये जल्दी खराब हो जाते हैं इसलिए बार-बार खरीदे जाते हैं, जिससे बाज़ार में हमेशा उनकी माँग रहती है।

ये कच्चा माल चाहिए होता है

  • कपड़ा – यह अलग-अलग रंगों और गुणवत्ता में रोल में आता है। साधारण स्क्रबर के लिए सफेद कपड़े का इस्तेमाल होता है। रंगीन और ग्लिटर स्क्रबर बनाने के लिए रंगीन कपड़े का इस्तेमाल किया जाता है।
  • फोम – स्क्रबर के अंदर गद्दे की तरह लगाने के लिए फोम की शीट इस्तेमाल होती है। सभी तरह के स्क्रबर के लिए फोम की गुणवत्ता एक ही रहती है।
  • स्टील वूल पैड – खासकर स्टील फोम पैड स्क्रबर में अंदर ज़्यादा रगड़ लगाने के लिए स्टील का पैड इस्तेमाल किया जाता है।
  • पैकिंग का सामान – स्क्रबर को पैक करने के लिए प्लास्टिक की थैलियां, बैंड, स्टिकर और डिब्बे आदि ज़रूरी होते हैं।

स्क्रबर बनाने की प्रक्रिया

  • कपड़े के रोल को स्टील की पट्टी के चारों ओर लपेटा जाता है।
  • कपड़े के अंदर फोम की शीटें नियमित अंतराल पर डाली जाती हैं। ये काम हाथ से या लोहे की रॉड का इस्तेमाल करके किया जा सकता है।
  • फिर इस कच्चे माल को सील लगाने और काटने वाली मशीन में डाला जाता है।
  • मशीन कपड़े के खुले किनारे को सारी लंबाई में अपने आप सील कर देती है।
  • स्क्रबर की निरंतर बनती चादर को अलग-अलग स्क्रबर में काट देती है।
  • तैयार स्क्रबर मशीन के दूसरे छोर से पैक करने के लिए निकल आते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया को एक ही व्यक्ति संभाल सकता है। मशीन ज़्यादातर काम अपने आप ही कर लेती है। तो फिर देर किस बात की? कम निवेश में स्क्रबर बनाने का बिज़नेस शुरू करके अच्छा मुनाफ़ा कमाइए!

स्क्रबर बनाने की मशीनें और लागत

जिन मशीनों की ज़रूरत होगी:

  • सीलिंग और कटिंग मशीन – इसकी कीमत करीब ₹3.4 लाख है। ये एक दिन में 1000 दर्जन स्क्रबर सील करके काट सकती है।

कुछ ज़रूरी अतिरिक्त सामान:

  • एयर कंप्रेसर – सीलिंग मशीन चलाने के लिए। लागत लगभग ₹30,000.
  • सर्वो स्टेबलाइज़र – बिजली के उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए। लागत लगभग ₹10,000.

इस तरह मशीनों पर कुल निवेश करीब ₹3.8 लाख होता है।

बनाने की लागत और मुनाफा

स्क्रबर बनाने की लागत में कच्चा माल और मेहनत की लागत शामिल है।

  • साधारण सफेद स्क्रबर बनाने का खर्च करीब ₹22 प्रति दर्जन आता है।
  • रंगीन और ग्लिटर स्क्रबर बनाने का खर्च करीब ₹29-30 प्रति दर्जन आता है।
  • स्टील फोम पैड स्क्रबर बनाने का खर्च कच्चे माल के लिए ही करीब ₹55-60 प्रति दर्जन आता है।

बनाए गए स्क्रबर एक दर्जन के पैक में रिटेलरों को बेचे जाते हैं।

  • साधारण स्क्रबर ₹28-29 प्रति पैक में बेचे जा सकते हैं, जिससे ₹6-7 प्रति पैक मुनाफा मिलता है।
  • रंगीन/ग्लिटर स्क्रबर ₹35-36 प्रति पैक में बेचे जा सकते हैं, जिससे ₹6-7 प्रति पैक मुनाफा मिलता है।
  • स्टील फोम पैड स्क्रबर ₹70-80 प्रति पैक में बेचे जा सकते हैं, जिससे ₹15-25 प्रति पैक मुनाफा मिलता है।

इस तरह मुनाफा बनाने की लागत का लगभग 20-30% होता है।

उत्पादन क्षमता और मुनाफा का अनुमान

सीलिंग मशीन की रोज़ाना 1000 दर्जन बनाने की क्षमता है, यानी रोज़ाना 1000 पैक बनाए जा सकते हैं। औसतन ₹10 प्रति पैक मुनाफा लेकर रोज़ाना मुनाफा ₹10,000 होगा।

  • 25 दिन उत्पादन में महीने का मुनाफा = ₹10,000 x 25 दिन = ₹2,50,000 प्रति माह।
  • 300 दिन उत्पादन में सालाना मुनाफा = ₹10,000 x 300 दिन = ₹30 लाख प्रति साल।

तो छोटे स्तर पर स्क्रबर बनाने का बिज़नेस साल दर साल शानदार मुनाफा ला सकता है।

मार्केटिंग और बिक्री के ज़रिए

बनाए गए स्क्रबर पैक को इन तरीकों से बेचा जा सकता है:

  • होलसेल डीलर – सबसे आसान तरीका पूरा उत्पादन थोक व्यापारियों को बेचना है जो रिटेल दुकानों को सप्लाई करते हैं। होलसेल डीलर को 10% का मुनाफा दिया जा सकता है।
  • रिटेल शॉप – सीधे रिटेल दुकानों को बेचना ज़्यादा फायदेमंद है लेकिन इसके लिए ज़्यादा कोशिश करनी पड़ती है। डीलर का मुनाफा न देने से फायदा ज़्यादा मिलता है।
  • सुपरमार्केट और मॉल – स्क्रबर के बड़े पैक सीधे आधुनिक रिटेल स्टोर को भी सप्लाई किए जा सकते हैं।
  • ऑनलाइन बिक्री – अपनी वेबसाइट या अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स साइट्स के ज़रिए बेचने से भी अच्छी संभावना है।

सफलता के लिए सही मार्केटिंग और ब्रांड बनाने की जागरूकता ज़रूरी है। पैकिंग ऐसी होनी चाहिए जो ग्राहकों को पसंद आए।

निष्कर्ष

स्क्रबर बनाना शुरू करने के लिए मशीनों और कच्चे माल में कम पैसा लगाना पड़ता है। लेकिन इसकी माँग हर वक्त रहती है और बनाने में खर्च भी कम आता है, इसलिए मुनाफा बहुत ज़्यादा होता है। ये एकदम सही छोटा कारोबार है जिसे सिर्फ 3-4 लाख रुपये के निवेश से शुरू किया जा सकता है और अच्छी कमाई की जा सकती है। अगर सही मार्केटिंग की जाए और अच्छे क्वालिटी के स्क्रबर बनाए जाएं, तो इसमें बहुत सफलता मिल सकती है।

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